Ajay

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जुस्तजू भाग --- 3

तुझे पाने को तड़पा किए उम्र भर,

पा लिया तो न खोने की जिद है जिंदगी से।।

आरूषि अपने कमरे में आते ही आंसुओं में डूब गई। बेआवाज़, दर्द में घुलती हिचकियां उसके पूरे बदन को बार बार कंपकपा रही थी। बेशक रगों में बह रहे राजपूती ख़ून का जोश और उसकी पहचान उसे जमाने के सामने मजबूत क़िरदार और गंभीरता का चोला औढ़ाये रखती थी पर वह थी तो हाड़ मांस की इंसान ही। मम्मी पापा के अचानक दुर्घटना में चले जाने से आज तक क़िस्मत की आजमाइशों से लगातार मुक़ाबला कर रही थी।

"क्यों, क्यों, क्यों,  नहीं नफ़रत कर पाई आपसे ? यूं अचानक गायब हो जाना और अब जब सीख रही हूं अकेले चलना तो इस तरह लौट आए फिर से मुझे तोड़ने के लिए !!"

 अब अनुपम को इस तरह अचानक फिर से मिलने के बाद भी उसे पाने की खुशी महसूस नहीं कर पा रही थी। वह, जिसे कब से ढूंढ रही थी ! जिसके साथ उसे केवल 2 दिन का साथ ही मिल पाया था उसे।
वो 2 दिन जिसने उसकी जिंदगी में तूफ़ान बरपा दिया था !!!

"तो यह थी तुम्हारी साज़िश कान्हा ?? इसलिए आज बुला लिया था तुमने अपने मंदिर में !! आखिर क्या बिगाड़ा है मैने तुम्हारा ?? क्यों परीक्षा लेते रहने पर तुले हो !! और कब तक देनी है, कुछ तो पता चले !!!"

आज जैसे शिकायतों का पिटारा खोला था उसने। गज़ब यह कि कोई और होता तो आज दिन भर की शारीरिक और मानसिक थकन से टूटकर बिस्तर पर गिर चुका होता पर उसके शरीर की थकान पर मन के झंझावात भारी थे। तभी ड्राइंग रूम से उसे अपने बच्चे और अनुपम की आवाजे आने लगी।

उसने उठकर झांका तो दोनों एक दूसरे में उलझे थे।

"हां तू भी भूल जा मुझे। आख़िर ख़ून उन्ही का है न!! अब क्यों याद आयेगी मेरी ?? मिल गए बाप बेटे तो मां क्यों चाहिए ??" आज जैसे सबसे शिकायत थी।

"मम्मा, मम्मा !! देथो न वो बड़े अंतल मेली बात नहीं सुन लहे !! औल खेल अधूला थोलकल थो दए।" अपने बच्चे की आवाज़ और खिंचता आंचल उसे फिर से लौटा लाए थे आज में।

" इन्हें भेजा नहीं आपने ?"

"अरे कहां !! और कैसे भेज दूं बिना खिलाए ??" मां ने हैरत से पूछा।

"तो जगाइए इन्हें और खिलाकर भेज दीजिए। इनके लोग इनका इन्तजार कर रहे होंगे।"

"इन्हें तो तेज़ बुखार है, देख न !!" छूते ही मां की चिंता भरे स्वर में बोली।

"क्या ???" वह सब भूल बैठी। हाथ लगाया तो सच में शरीर जल रहा था अनुपम का।

तभी दरवाजा खटखटाया। मां ने खोला तो डॉक्टर सौम्या और ड्राइवर और गनमैन अंदर आ रहे थे।

"बॉस, आप इजाज़त दे तो क्या मैं आपके पास रुक सकती हूं?" सौम्या ने घुसते ही पूछा।

"मैडम, साहब अंदर हैं क्या ? " दूसरी आवाज़ उन दोनों की थी।

"ठीक है डॉक्टर, आप मां के साथ सो जाइएगा और आप दोनों इन्हें उस कमरे में लिटाइए, इन्हें तेज बुखार है।" आरूषि दोनों सवालों का जवाब देते हुए अपने कमरे की ओर इशारा करके बोली।

"क्या ??" वे तीनों आश्चर्य से एक साथ बोल पड़े।गनमैन और ड्राइवर ने मिलकर अनुपम को अंदर लिटा दिया।

"मैडम प्लीज़ हमारे साहब को ठीक कर दीजिए। ये बहुत अच्छे और मेहनती हैं। ऐसे कलेक्टर साहब हमने पहले केवल सुने ही थे। देर रात तक काम ही करते रहते हैं।" ड्राइवर बोला।

"मैडम, आज ही देखिए न ! लोगों को बचाने बारिश और ठंड की परवाह किए बिना खुद पानी में कूद पड़े। कितना कहा पर जब तक सारा कुछ संभल नहीं गया, कपड़े तक नहीं बदले और घायलों को बचाने के लिए अपना ख़ून भी दिया।" गनमैन बोला। दोनों की आंखों में आंसू थे।

"इसी का नतीज़ा है यह बुखार। आप दोनों चिंता न करें और बगल में कंपाउंडर के क्वार्टर में रुक जाएं। आज वह डिस्पेंसरी में ही रहेगा। और डॉक्टर आप इन्हें मेडिकैथ लगाने में मदद करें मेरी।"आरूषि फिर से मजबूत क़िरदार थी।

"बॉस, आप केवल सौम्या कहें मुझे", सौम्या आरूषि से बेहद प्रभावित थी।

"आप भी बॉस या डॉक्टर नहीं बुलाएं मुझे।"आरूषि ने कहा।
"आप बुरा न मानें तो आपको दी बुला सकती हूं मैं ?" सौम्या ने अनुमति मांगी।

"तो तुरंत इन्हें ग्लूकोज लगाएं और मां आप ठंडा पानी और कपड़ा ला दे मुझे। इनके पट्टियां करनी पड़ेगी।" आरूषि एक जिम्मेदार डॉक्टर की भूमिका में थी।

"दी, आप कुछ आराम कर लें। मैं इन्हें संभालती हूं।"

"नहीं सौम्या, आप भी थकी होंगी। मुझे तो आदत है इन सबकी। मां इन्हें खाना खिला दें और इशांत और इन्हें अपने साथ सुला लें।" आरूषि ने दोनों को जबरदस्ती भेज दिया था।

फिर उसकी क़िस्मत ने उसे उलझा दिया था। जिस चेहरे को देखने के लिए, जिससे मिलने के लिए इतना बेसब्री से इंतज़ार किया था उसने। उसी को शिकायत भी करने का मौका न मिला था उसे।

"जब भी मिलेंगे तब ही बीमार मिलेंगे। कभी भी कुछ कह कहां पाती हूं।" आरूषि ईलाज करते करते यादों में खो गई। 3 साल पहले के वे 4 दिन जिसने उसे अनुपम से ऐसा रिश्ता बना दिया था उसका।




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10 Comments

Shaqeel

24-Dec-2021 02:30 PM

Good

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Ajay

29-Dec-2021 10:32 PM

अगले भाग भी पढ़कर अपनी समीक्षा दीजिएगा।

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Sandhya Prakash

15-Dec-2021 06:48 PM

Nice...+

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Ajay

15-Dec-2021 08:52 PM

🙏🏻🙏🏻

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Milind salve

09-Dec-2021 08:23 PM

Bahut بہترین کہانی

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Ajay

09-Dec-2021 08:31 PM

Thanks

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